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फेब्रुवारी, २०२६ पासूनच्या पोेस्ट दाखवत आहे

शायरी

  रूह तक रस्ता बनाया जा रहा है, जिस्म को जरिया बनाया जा रहा है। जख्म पर नहीं आँख पर बांधी है पट्टी, चोट को अंधा बनाया जा रहा है । नस्ल को इस भीड़ का आदि बना कर, अस्ल में तन्हा बनाया जा रहा है । पाप को अंजाम देने के लिए अब , धर्म को जरिया बनाया जा रहा है । जिंदगी का मैल है ये शायरी भी, मैल से पैसा बनाया जा रहा है ।